मेरी life है ये कुछ कहती है...
क्यूँ चुप-चाप ये रहती है...
कबसे ये बै ठी है,
बादल पे नज़र डाले ,
दरीया में ये रहती है,
पर सावन को तरसती है
बंदी नहीं ये मानती है,
खुद को पहचानती है,
मुस्कुरा देती है दिल से,
जब खुद में ही ख़ुशी पाती है
आहट हूई कोई आया है,
हाँ अपना ही मगर साया है,
अब राज़ ये जाना है
क्या कहती क्या सुनती है
क्यूँ गुमसुम सी रहती है,
बस इंतज़ार करती है,
आजाद परींदे सी अब,
आकाश में उडती है
मेरी life है ये कुछ कहती है...
क्यूँ चुप-चाप ये रहती है...
हमेशा बेहतरीन की आशा !!!
क्यूँ चुप-चाप ये रहती है...
कबसे ये बै ठी है,
बादल पे नज़र डाले ,
दरीया में ये रहती है,
पर सावन को तरसती है
बंदी नहीं ये मानती है,
खुद को पहचानती है,
मुस्कुरा देती है दिल से,
जब खुद में ही ख़ुशी पाती है
आहट हूई कोई आया है,
हाँ अपना ही मगर साया है,
अब राज़ ये जाना है
क्या कहती क्या सुनती है
क्यूँ गुमसुम सी रहती है,
बस इंतज़ार करती है,
आजाद परींदे सी अब,
आकाश में उडती है
मेरी life है ये कुछ कहती है...
क्यूँ चुप-चाप ये रहती है...
हमेशा बेहतरीन की आशा !!!