Monday, December 03, 2012

हर दिन एक नया दिन!!!

हर दिन एक नया दिन,
हर दिन कोई नयी बात,
हर रात एक नयी रात,
हर पल कोई नयी सोच।।।

सोच में हूँ क्या चाहता हूँ इस पल से,
कभी न ख़त्म होने वाला एक सफ़र जैसे।।।

चलते चलते इतनी दूर निकल जाऊं,
के किसी को भी ना नज़र आऊ।।।

रुक जाता हूँ कभी कभी चल देता हूँ,
करता हूँ इनकार कभी मान जाता हूँ।।।

रस्ते में मिलता है कोई तो बात कर लेता हूँ,
नाम पे अपने ही हस लेता हूँ।।।

दूर हूँ खुद से या पास पता नहीं,
हर बात में नहीं होता गलत या सही।।।

खुदा है या नहीं ये जनता नहीं हूँ,
मगर खुद में यकीं रखता हूँ।।।

सबसे अच्छे की आशा है।।।

2 comments:

Unknown said...

खुदा है या नहीं ये जनता नहीं हूँ,
मगर खुद में यकीं रखता हूँ।

Beautiful...

Prit said...

Thanks for the comment..i really appreciate.. :)