ना मकान का पता है,
ना शहर की खबर है,
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं..
एक सदा आ रही है दिल से, ये धीरे धीरे,
के क्यूँ हम खुद में ये सारा जहाँ ढूडते हैं|
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
ना माझी ना लहरों का पता है,
ना बारिश न सूरज की किरणों की खबर है,
फूलों ने रंगों से है दुनिया सजाई...
हर एक मौसम में खुशियाँ तमाम ढूंडते हैं|
नाराज़ हमीसे हम हैं शायद,
कुछ कहते नहीं हैं,
हर आवाज़ से बोलना चाहते हैं|
चाहते हैं कोई मना ले हमे,
न जाने क्यूँ ये इनायत चाहते हैं.
खुद में ही न खो जाएँ हम ये डर है,
इसलिए हर एक आईने में अपना सब्ब ढूंडते हैं|
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
एक सदा आ रही है दिल से, ये धीरे धीरे,
के क्यूँ हम खुद में ये सारा जहाँ ढूडते हैं.
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
ना शहर की खबर है,
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं..
एक सदा आ रही है दिल से, ये धीरे धीरे,
के क्यूँ हम खुद में ये सारा जहाँ ढूडते हैं|
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
ना माझी ना लहरों का पता है,
ना बारिश न सूरज की किरणों की खबर है,
फूलों ने रंगों से है दुनिया सजाई...
हर एक मौसम में खुशियाँ तमाम ढूंडते हैं|
नाराज़ हमीसे हम हैं शायद,
कुछ कहते नहीं हैं,
हर आवाज़ से बोलना चाहते हैं|
चाहते हैं कोई मना ले हमे,
न जाने क्यूँ ये इनायत चाहते हैं.
खुद में ही न खो जाएँ हम ये डर है,
इसलिए हर एक आईने में अपना सब्ब ढूंडते हैं|
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
एक सदा आ रही है दिल से, ये धीरे धीरे,
के क्यूँ हम खुद में ये सारा जहाँ ढूडते हैं.
हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं....
6 comments:
Welcome back :)
First of all, I loved these lines:
खुद में ही न खो जाएँ हम ये डर है,
इसलिए हर एक आईने में अपना सब्ब ढूंडते हैं|
I am not n expert myself, but i somehow feel that it would strike a better note if u don't repeat हमें क्या पता के हम क्या ढूंडते हैं.... after every stanza...may b a poet wil give u better suggestion abt d same...nonetheless a gud comeback
Hey Viraj...thanks a lot...u knw wht..sometimes u just have nothing to write for dayz n months..but then one day u just sit down n thoughts just start flowing down from ur mind..like a waterfall..n i just followed the stream...
N yes i too feel i should not have repeated the lines...thanks for being a critic too.. :)
can't expect less than you. it is beautiful.
its simply wonderful...
Thanks neena :)..n thanks meghaa.. :)
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